पंजाब और हरियाणा में धान की खेती जोरों पर है कारण कि यहाँ कई दशकों से किसानों को प्रदेश सरकार मुफ्त में बिजली देती है। सरकार चाहे जिसकी भी हो किसी की औकात नहीं जो किसानों को बिजली बेचने का साहस करे।
यहां धान की ऐसी फसलें होती हैं जो देर से पकती हैं और उनमें पानी भी अधिक लगता है।
पैदावार अधिक लेने की प्रत्याशा में किसान देर से पकने वाली इन फसलों को लगाता है। इसके दुष्परिणाम के बारे में यदि चर्चा करें तो पंजाब और हरियाणा का भूगर्भ जल बहुत तेजी से खिसक रहा है।
आने वाले समय में यहां एक एक बूंद पानी के लिए तरसना पड़ेगा। यह भी बताना आवश्यक है कि भूगर्भ जल का 70% हिस्सा सिंचाई के काम आता है।
पंजाब की खेती बाड़ी यूनिवर्सिटी ने बहुत पहले इस बात को जोर देकर कहा था कि धान की फसल कम करके किसी और फसल पर किसानों को ध्यान देना चाहिए जिसे पैदा करने में पानी की खपत कम हो और धरती के भीतर संचित पानी को हम बचा सके।
बरसात का पानी लगभग 85 से 90% व्यर्थ जाता है जिन्हें तालाब पोखरों और अन्य जल स्रोतों के माध्यम से हम संरक्षित नहीं कर पाते।
पंजाब और हरियाणा में यूपी तथा बिहार से भारी मात्रा में मजदूर आते हैं जो 1 महीने तक धान की रोपाई करके वापस चले जाते हैं। उन मजदूरों को खेत की रोपाई के आधार पर निश्चित मजदूरी तथा खाने पीने की सामग्री यहां के किसानों द्वारा दी जाती है।
इससे यह सिद्ध होता है कि बिहार और उत्तरप्रदेश में बेरोजगारी अधिक है या फिर मजदूर अपने यहां काम करना नहीं चाहते।
Underground water level is depleting in Punjab.
Why labours from Bihar come to Punjab?
कुछ इन्हीं बिंदुओं को लेकर यह वीडियो पंजाब के लुधियाना में स्थानीय किसान से की गई वार्ता पर आधारित है जो आपको अच्छा लगेगा।
इस प्रकार के तमाम बिंदुओं पर अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से वीडियो करता रहता हूं।
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और ऐसे मिल गए सरदार जी! फिर क्या हुआ देखें? What will happen to Punjab? braj bhushan iitk | |
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| Non-profits & Activism | Upload TimeStreamed live on 7 Jul 2018 |
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